Wednesday, February 8, 2012

काली मिर्च


काली मिर्च महत्वपूर्ण मसालों में से एक है तथा 'king of spices'  के नाम से जानी जाती है. यह एक सदाबहार बेल है जो दक्षिण भारत में अधिकतर कौफी  स्टेट्स  आदि में दूसरे पेड़ों पर चढ़ी  हुई पायी जाती है. वैसे तो मूलत यह दक्षिण भारत के वेस्टर्न घाट्स में पाई जाती है किन्तु अब इसे अधिकतर ट्रौपिकल देशों में उगाया जाता है.भोजन में  काली मिर्च का उपयोग गर्म मसाले मे किया जाता है.
मसाले के अतिरिक्त काली मिर्च का उपयोग कई रोगों में भी किया जाता है.
१. नेत्र रोगों में:

  • काली मिर्च का प्रयोग नेत्र ज्योति में बड़ा सहायक होता है. इस के पावडर को शुद्ध देसी घी के साथ  मिलाकर खाने से आँखों की ज्योति के साथ साथ आँखों के कई रोग भी दूर होते हैं.

२. श्वास सम्बन्धी रोगों में: 

  • आधी चम्मच काली मिर्च के पाउडर को थोड़े गुड में मिलाकर इसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर चूसने से खांसी में आराम मिलता है. 
  • पानी में तुलसी, काली मिर्च, अदरख, लौंग व् इलाइची डालकर उबालकर इसकी चाय बनाकर पीने से ज़ुकाम व् बुखार में लाभ होता है. 
  • बारीक  पिसी काली मिर्च, मुलहठी और मिश्री मिलाकर रख लें, इस मिश्रण को एक चुटकी शहद के साथ मिलाकर खाने से गले की तकलीफ में लाभ होता है तथा आवाज़ भी साफ होती है.

३. पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों में: 

  • काली मिर्च को किशमिश के साथ मिलाकर २-३ बार चबाकर खाने से पेट के कीड़े दूर होते हैं. 
  • छाछ में काली मिर्च पाउडर मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं .
  • नीबू के टुकड़ों से बीज निकालकर इसमें पिसा काला नमक और काली मिर्च पाउडर भरकर गर्म करके चूसने से बदहजमी में लाभ होता है. 
  • एक कप गर्म पानी में ३-४  पिसी काली मिर्च के साथ नीम्बू का रस  मिलाकर पीने से गैस की शिकायत दूर होती है.

४. विभिन्न रोगों में :

  • नमक के साथ पिसी काली मिर्च मिलाकर दातों में मंजन करने से पायरिया ठीक होता है तथा दांत भी मज़बूत और चमकदार होते हैं. 
  • पिसी काली मिर्च को थोड़े से शहद के साथ मिलाकर लेने से स्मरण शक्ति बढ़ती है. 
  • खाने में लाल मिर्च की जगह काली मिर्च का प्रयोग करना अधिक फायदेमंद होता है. 
  • पानी के साथ काली मिर्च को पीसकर उस लेप को लगाने से सूजन दूर होती है. 
  • पिसी काली मिर्च  को तिल के तेल में जलने तक गरम करें. ठंडा करके इस तेल को मांस पेशियों  पर लगाने से गठिया के दर्द में फायदा होता है.
***


Thursday, January 5, 2012

हेल्थ टिप


 थके हुए पैरों को आराम देने के लिए ३ ड्रॉप रोजमेरी आयल , ३ ड्रॉप लेवेंडर आयल , ३ ड्रॉप ऑरंज आयल  और ३ ड्रॉप पिपरमिंट आयल को  आधा बकेट हलके गुनगुने  पानी में डाल कर इसमें करीब २० मिनट के लिए अपने पैरों को रखें. इस ऐरोमेटिक फुट - बाथ से पैरों की थकान दूर होगी तथा आराम मिलेगा. इन्ही तेलों को ३० मि. ली. कैरिएर आयल में मिलाकर  मालिश करने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है.



To relax your tired feet, mix 3 drops each of Rosemery, Lavender , Orange and peppermint oils  in half a bucket of luke warm water. Now put your feet in this water for about 20 minutes and enjoy this aromatic foot-bath. It will relax and refresh your feet. These oils can also be blended in 30 ml of carrier oil and used for foot massaging.

Thursday, December 29, 2011

Ajowan



Ajowan or Ajawayan is a very common ingredient of Indian cuisine. It is found through out the length and breadth of the country and is commercially grown in a number of provinces.
The Plant:  Its plant is about 1 to 3 feet in height and its seeds are used in different medications in different systems of medicines like Yunani & Siddha etc. It is warm in nature and aids in digestion, cough, gastric ailments, pain and helminthiasis etc. It also relieves painand massage with ajowan oil brings relief in pain and swelling.
Different Names: It is known as Ajwayan in Hindi, Yavanika in Sanskrit, Ajamod in Gujarati, Oma in Kannada& Ajowan in English.
Uses:
In Stomach-ache: 

  • Ajowan and black salt if taken with water relieve gastric problems, indigestion and stomach-ache.
  • One TSP of ajowan seeds if taken daily aid in digestion.
  • In case of stomach-ache , grind ajowan seeds, black salt & dry ginger. taking this powder with water brings quick relief.
  • You can add a pinch of ajowan seeds to the dough for making chapathis/ paranthas. It is very tasty as well as easy to digest.
  • Taking half TSP of ajowan seeds along with butter milk at bed time helps in expulsion of helminths. In case of kids having helminths, you can give half TSP of these seeds 2-3 times in a day.

In cough & fever:

  • Chewing of 1 TSP ajowan seeds & drinking it down with warl water helps in cough.
  • Boil ajowan seeds in water. Drinking this water brings relief in flue.
  • Chewing one TSP of seeds and drinking it down with hot tea 2-3 times in a day brings relief in cold, cough, headache & joint pain.
  • If chewed along with betel leaves, they aid in cough & gastric problems.

In Skin Troubles:

  • Boil seeds in water. Washing and cleaning wounds, boils & exima etc with this water and application of grounded ajowan seeds to the affected parts brings relief under these situations.
  • It also acts like an antiseptic.
  • Consuming half TSP ajowan seeds with half cup water also aids in skin related problems.
In other Ailments:

  • Burn its seeds and powder them, now add rock salt and use this mix as a tooth powder for cleaning teeth. It aids in teeth and mouth related problems.
  • Application of grounded leaves on insect bites helps in reducing pain & swelling.
  • During pregnency if taken with jaggery, it helps in pain relief.
  • Taking butter milk with black salt & half TSP seeds daily after lunch helps in correcting gastric problems.

***

Tuesday, December 13, 2011

गुडहल


गुडहल दिखने में सुन्दर एक बहुवर्षीय पौधा है,जो लगभग ४ से ८ फीट ऊंचा होता है.इसमें दो तरह की किस्में पाई जाती हैं जिनमें लाल तथा सफेद रंग के फूल लगते हैं जिनकी अपनी अलग अलग उपयोगिता है.इसके पत्ते चमकीले गहरे हरे रंग के होते हैं तथा इनके किनारे गुलाब के पत्तों की तरह कटे हुए होते हैं. यह प्रायः बागानों में अकेले अथवा हेजेस  बनाने में लगाया जाता है.गुड़हल का पौधा दिखने में सुन्दर होने साथ ही बेहद उपयोगी भी है तथा यह सारे भारत में पाया जाता है.
विभिन्न नाम:  इसे असमी  तथा बंगाली में जोबा, गुजराती में जसुवा, कन्नडा में दसवाल, कोंकणी में दासुन, मलयाली में चेम्बाराठी, संस्कृत में जपा तथा तमिल में सेम्परुथी तथा इंग्लिश में शू फ्लोवर एवं लेटिन में हिबिस्कस रोसा सिनेनसिस के नाम से जाना जाता है.
अधिकतर गुडहल के फूलों का उपयोग किया जाता है.
केश:
·         बालों के लिए गुडहल विशेष रूप से उपयोगी है.इसके फूलो को पीस कर बालों  में लगाने से वे बढ़ाते हैं तथा उन्हें पोषण मिलता है, गंजापन दूर होता है तथा सिर को शीतलता मिलती है.
·         इसके पत्ते भी बड़े गुणकारी होते हैं. इन्हें भी फूलों के साथ पीसकर १-२ घंटों के लिए बालों में लगाने से केश सम्बंधित समस्याएं दूर होती हैं.
·         इसके फूलों को पीसकर पावडर बना लें  तथा इसमे मेहंदी और हेयर  पैक में मिलाकर लगाने से भी बाल काले, चमकीले तथा लम्बे होते हैं.
मुंह के छाले:
·         इसके साफ फूलों को चबाने से मुहं के छालों में आराम मिलता है.
स्मरण शक्ति:
·         गुडहल के पत्ते तथा फूलों को सुखाकर पीस लें. इस पावडर की एक चम्मच मात्रा को एक चम्मच मिश्री के साथ पानी से लेते रहने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढाती है.
दर्द तथा सूजन:
·         इसके पत्तों को पानी के साथ पीसकर इस लेप को सूजन पर लगाने से दर्द तथा सूजन में आराम मिलता है.
अन्य रोगों में:
·         गुडहल के फूलों को सुखाकर बनाया गया पावडर दूध के साथ एक एक चम्मच लेते रहने से रक्त की कमी दूर होती है.
·         वात, खांसी व कफ में भी इन फूलों को पीसकर  एक एक चम्मच सुबह- शाम लेते रहने से आराम मिलता है.
·         इसका गुलकंद व शरबत बनाकर लेने से भी कई रोगों जैसे लू लगना, चक्कर आना, बेहोशी तथा सर दर्द इत्यादि में फायदा होता है.

Thursday, December 1, 2011

सेहत भरी है सौंफ


सौंफ की खेती पूरे देश में की जाती है. यह लगभग सभी जगह पाई जाती है तथा प्राचीन काल से ही इसका उपयोग रसोई में तथा औषधि के रूप में किया जाता रहा है. इसका पौधा खुशबूदार होता है.
स्वाद में मीठी होने के साथ इसकी तासीर ठंडी होती है. सौंफ में कैल्शियम,  आयरन, सोडियम तथा पोटेशियम जैसे अहम् तत्व होते हैं. यह आंतों की मरोड़ को तथा उलटी को शांत करने वाली औषधि है. भोजन के बाद रोजाना  सौंफ लेने से कोलेस्ट्रोल काबू में रहता है. यूनानी दवाओं में सौंफ की बेहद सिफारिश की जाती है.
सौंफ के विभिन्न नाम 
हिंदी में इसे सौंफ, संस्कृत में मिश्रेय या मधुरिका, गुजराती में वरियाली, कन्नड़ में सोंपू, तथा इंग्लिश में फेंनेल के नाम से जाना जाता है.
पाचन सम्बन्धी रोगों में प्रयोग 

  • सौंफ के बीजों से तेल निकाला जाता है. यह पेट के दर्द को दूर करने में सहायक होता है. 
  • सोते समय साफ पिसी सौंफ एक चम्मच पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है.
  •  इसे घी में भूनकर मिश्री के साथ सेवन करने से डायरिया रोग में लाभ होता है. भोजन के बाद सौंफ का प्रयोग बहुत फायदा करता है. 
  • मुंह की दुर्गन्ध, अपच तथा कब्ज को दूर करती है. इसके अलावा यह मुंह के छालों में आराम देती है तथा गर्मी के कारण होने वाले रोगों में फायदेमंद होती है. पिसी सौंफ और  काला नमक मिलाकर खाने से पेट दर्द में आराम होता है.
  • इसे भूनकर बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर पावडर बना लें. इसे आधा आधा चम्मच पानी के साथ लेते रहने से मरोड़, अपच और पेचिश में आराम मिलता है.
  • इसकी पतियाँ भी भूख मिटाने तथा पाचन क्रिया में मदद करती हैं. 
नेत्र ज्योति और यादाश्त में सहायक 

  • सौंफ और मिश्री(अथवा शक्कर) को बराबर मात्रा में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से नेत्र ज्योति बढती है. नींद भी अच्छी आती है. 
  • गर्मियों में इससे बनी ठंडाई लेने से शरीर में शीतलता बनी रहती है. गर्मी से होने वाली बीमारियों में आराम मिलता है. दिमाग को शीतलता मिलती है. स्मरण शक्ति बढती है.
अन्य रोगों में प्रयोग 

  • सौंफ का प्रयोग कफ,खांसी तथा अस्थमा में लाभकारी है 
  • पिसी सौंफ को समान मात्रा में मिश्री के साथ सेवन करने से बवासीर रोग में आराम मिलता है.
  • यह कोलेस्ट्रोल कम करने में भी मदद करती है.
  • इसके प्रयोग से मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती है.  

Tuesday, November 22, 2011

हेल्थ टिप



मसाला चाय में अन्य मसालों के साथ उपयोग की गयी छोटी इलाइची विशेष रूप से मानसिक तनाव ( depression  ) में फायदा देती है.


Cardamom used in Masala tea along with other spices is very useful in depression.

Tuesday, November 15, 2011

विभिन्न रोगों में फायदेमंद हैं दालचीनी और शहद


दालचीनी  एक सदापर्णी (Evergreen)  छोटा पेड़ है. इस पेड़ की सूखी पत्तियां तथा छाल को  पूरे विश्व में मसालों में उपयोग किया जाता है. इसकी छाल थोड़ी मोटी, चिकनी तथा हल्के या कुछ गहरे ब्राउन रंग की होती है. दालचीनी के लिए मोटी छाल के अन्दर की पतली छाल को निकालकर उसे सुखाकर बनाया जाता है. सूखने पर दालचीनी घुमावदार आकृति में बदल जाती है. इस पेड़ के विषय में प्राचीन काल से ही लगभग २७०० ईसा पूर्व से ही पता था.चीनी, रोमन तथा भारतीय इसके औषधीय गुणों से भलीभांति परिचित थे तथा इलाज में इसका उपयोग करते थे. इसे  रक्तशोधक तथा शक्तिवर्धक पावडर और काढ़े  के  रूप में उपयोग किया जाता है.  दक्षिण  भारत में  यह लगभग ५०० मीटर की ऊंचाई तक पाया जाता है. शहद तथा दालचीनी का मिक्सचर अधिकतर बीमारियों जैसे हार्ट डिसीज़ , कोलेस्ट्रोल, त्वचा रोग, सर्दी ज़ुकाम, पेट की बीमारियों आदि में बहुत लाभकारी होता है.


सर्दी जुकाम में दालचीनी: 

  • एक चम्मच शहद में ज़रा सा दालचीनी पाउडर  मिलाकर सुबह शाम लेने से खांसी-जुकाम में आराम मिलता है.
  • हल्के गर्म पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर तथा एक चुटकी पिसी काली मिर्च मिलकर शहद में मिलाकर पीने से जुकाम तथा गले की खराश दूर होती है.
  • इसके पाउडर को थोड़े से पानी में मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाने से ठंडी हवा से होने वाले सिर दर्द में आराम मिलता है.

जोड़ों के दर्द में: 

  • हल्के गर्म पानी में इसके पाउडर और थोड़े से शहद को मिलाकर शरीर में दर्द वाले अंग पर लगाने और हलकी मालिश करने से फायदा मिलता है.
  • एक कप हल्के गर्म पानी में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर  पीने से भी जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.

त्वचारोगों में दालचीनी:

  • त्वचा में खाज और  खुजली होने पर दालचीनी पाउडर तथा शहद बराबर मात्रा में लेकर लगाने से लाभ होता है.
  • इसके पाउडर में थोडा सा नीबू का रस मिलाकर चेहरे पर  लगाने से कील मुंहासे दूर होते हैं.

अपच में दालचीनी : 

  • इसके प्रयोग से उलटी तथा दस्त में आराम होता है.
  • एक चम्मच शहद के साथ ज़रा से दालचीनी पाउडर को मिलाकर लेने से पेट दर्द और एसिडिटी में आराम मिलता है तथा भोजन आसानी से पच जाता है. 

अन्य रोगों में दालचीनी:
  • एक चम्मच शहद में ज़रा सा दालचीनी का पाउडर मिलाकर दांतों पर रोज़ दो-तीन बार  मलने से दांत दर्द में आराम मिलता है.
  • शहद के साथ ज़रा सा पाउडर मिलाकर लेते रहने से मानसिक तनाव में आराम मिलता है तथा स्मरण शक्ति भी तेज़ होती है.
  • दालचीनी का प्रयोग रक्त शर्करा तथा कोलेस्ट्रोल कम करने में सहायक होता है.
  • यह दूसरी बीमारियों जैसे अस्थमा तथा लकवा   में भी बहुत फायदा पहुंचती है.
  • मसाला चाय में अन्य मसालों जैसे तुलसी, अदरक,इलाइची', लवंग इत्यादि के साथ दालचीनी डालने से यह स्वाद के साथ साथ बहुत फायदा भी देती है.
गर्भवती स्त्रियों को दालचीनी का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
*****